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किसी अंधविश्वास का न हो शिकार क्योंकि आपका कोई अपना भी हो सकता है स्किज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारी का शिकार

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स्किज़ोफ्रेनिया एक मानसिक रोग है। जो एक पुरानी और गंभीर मानसिक विकार है जिसे मनोविदलता भी कहते हैं। यह रोग व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। स्किज़ोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति में अक्सर व्यक्तित्व विभाजन देखने को मिलता है जिसके कारण रोगी का वास्तविकता से संबंध टूट जाता है। इस वजह से व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को संभालने और देखभाल करने में असमर्थ हो जाता है।

हालांकि स्किज़ोफ्रेनिया अन्य मानसिक विकारों के जितना कॉमन नहीं है। इस मानसिक रोग में व्यक्ति सोचने- समझने की शक्ति तो खो ही देता है साथ ही वे खुद को भी खोने लगते है। वे हमेशा एक दर में जीते है और अपने साथियों से दूर होने लगते है। ऐसे लोग अंत में आत्महत्या कर लेते है।स्किज़ोफ्रेनिया के रोगियों में सबसे अधिक रोगी 20 से 24 साल तक के होते है।अक्सर देखा गया है कि स्किज़ोफ़्रेनिया से पीड़ित एक तिहाई लोग सामान्य जीवन में लौट आते हैं, उनमें से एक तिहाई सामान्य से ज़रा कम के स्तर पर क्रियाशील जीवन में लौटते हैं और वे स्थितियों से निपटने में सक्षम होते हैं, शेष एक तिहाई लोगों को क्रियाशील या सामान्य जीवन बिता पाने में ज़्यादा सहायता की ज़रूरत पड़ती है।

स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षण:- स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षण तीन श्रेणियों में आते हैं: सकारात्मक, नकारात्मक और संज्ञानात्मक।

1. सकारात्मक लक्षण:- सकारात्मक लक्षण मनोवैज्ञानिक व्यवहार हैं जो आमतौर पर स्वस्थ लोगों में नहीं दिखाई देते हैं। सकारात्मक लक्षण वाले लोग वास्तविकता के कुछ पहलुओं के साथ “स्पर्श खो सकते हैं”। इसमें भ्रम, मतिभ्रम और सोच विकार शामिल हैं। कुछ मनोचिकित्सक इसमें सायकोमोटर समस्याएं भी शामिल करते हैं जो गतिशीलता को प्रभावित करती हैं। मतिभ्रम लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि दूसरे उन पर नजर रख रहे हैं, या उनके विचारों को पढ़ रहे हैं या उन्हें जान से मारना चाहते हैं। मतिभ्रम मरीज को कुछ ऐसा सुनना, देखना, महसूस करना या गंध का कारण बनता है जो होते ही नहीं है। विकारों को एक साथ जोड़ने या बोलने बनाने में कठिनाई हो सकती है।

2. नकारात्मक लक्षण:- नकारात्मक लक्षण सामान्य भावनाओं और व्यवहारों में बदलाव से संबंधित हैं। नकारात्मक लक्षण इमोशन और मोटिवेशन के दिमाग के हिस्सों को नहीं काम करता हुआ दर्शाते हैं। नकारात्मक लक्षणों में कोई प्लान बनाने, बोलने, अपने आप को व्यक्त करने या जीवन में आनंद लेने की क्षमता में कमी दिखती है। इसमें भावनात्मक उदासी या अभिव्यक्ति की कमी, एक योजनाबद्ध गतिविधि शुरू करने और बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है। इन लक्षणों को आलस्य या अवसाद के रूप में माना जा सकता है जो गलत है।

3. संज्ञानात्मक लक्षण:- कुछ रोगियों के लिए, स्किज़ोफ्रेनिया के संज्ञानात्मक लक्षण सूक्ष्म होते हैं लेकिन दूसरों के लिए वे अधिक गंभीर होते हैं और रोगी उनकी स्मृति या सोच के अन्य पहलुओं में परिवर्तन देख सकते हैं।संज्ञानात्मक लक्षणों में ध्यान और स्मृति के साथ समस्याएं शामिल होती हैं, खासकर एक लक्ष्य हासिल करने के लिए योजना और आयोजन में। सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहे रोगियों के लिए संज्ञानात्मक कमी को सबसे अधिक अक्षम कर देने वाला माना जा सकता है।

स्किज़ोफ्रेनिया के कारण:-

1. अनुवांशिक कारण :- मनोविज्ञानिकों के अनुसार स्किज़ोफ्रेनिया का एक कारण आनुवंशिकी भी  है। कई मामलो में पाया गया है एक अगर एक जुड़वाँ बच्चे को स्किज़ोफ्रेनिया है तो दूसरे में भी इसके लक्षण विकसित होने की संभावना रहती है। अगर माता- पिता में से किसी एक को ये रोग है तो उनके बच्चों को भी सकता है।

2. नशीले पदार्थ का सेवन :- ड्रग्स सीधे तौर पर स्किज़ोफ्रेनिया का कारण नहीं बनती, लेकिन नशीली दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल से मनोविदलता के विकास का खतरा बढ़ जाता है। कुछ दवाएं, विशेष रूप से कैनबिस, कोकीन , एलएसडी या एम्फ़ैटेमिन के इस्तेमाल से इस रोग की लक्षण विकसित होते है।

3. तनाव :- कई तरह की तनावपूर्ण स्थितियां भी इस को जन्म देती है जैसे वियोग, नौकरी या घर खोने का दुःख, तलाक, रिलेशनशिप का अंत, शारीरिक, यौन या भावनात्मक दुःख आदि। ये घटनाये भी सीधे तौर पर स्किज़ोफ्रेनिया को जन्म नहीं देती लेकिन इसके विकास में जरुर मदद करती है।

स्किज़ोफ्रेनिया का इलाज़ :- स्किज़ोफ्रेनिया का इलाज़ आमतौर पर काफी लंबा होता है। लेकिन मनोवैज्ञानिक तरीके से इसका इलाज़ संभव है। यदि मरीज़ को रोग के शुरुआत से ही इलाज़ दिया जाये समस्या जल्दी पकड़ में आ जाती है। मनोवैज्ञानिक कई तरह की थेरेपी के जरिये मरीज के व्यवहार को सुधारने का प्रयास करते है। दवा और व्यवहारिक चिकित्सा के साथ उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया है जिससे व्यक्ति नार्मल जीवन जी सके। स्किज़ोफ्रेनिया में परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग, साइकोएजुकेशन भी दी जाती है।

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